श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.22.42

एकादश स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

नित्यदा ह्यंग भूतानि भवन्ति न भवन्ति च।

कालेनालक्ष्यवेगेन सूक्ष्मत्वात्तन्‍न दृश्यते॥ ४२

nityadā hyaṃga bhūtāni bhavanti na bhavanti ca|

kālenālakṣyavegena sūkṣmatvāttanna dṛśyate|| 42

अर्थ

प्यारे उद्धव! कालकी गति सूक्ष्म है। उसे साधारणतः देखा नहीं जा सकता। उसके द्वारा प्रतिक्षण ही शरीरोंकी उत्पत्ति और नाश होते रहते हैं। सूक्ष्म होनेके कारण ही प्रतिक्षण होनेवाले जन्म-मरण नहीं दीख पड़ते॥ ४२॥

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