श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.22.56

एकादश स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तस्मादुद्धव मा भुङ्क्ष्व विषयानसदिन्द्रियैः।

आत्माग्रहणनिर्भातं पश्य वैकल्पिकं भ्रमम्॥ ५६

tasmāduddhava mā bhuṅkṣva viṣayānasadindriyaiḥ|

ātmāgrahaṇanirbhātaṃ paśya vaikalpikaṃ bhramam|| 56

अर्थ

प्रिय उद्धव! इसलिये इन दुष्ट (कभी तृप्त न होनेवाली) इन्द्रियोंसे विषयोंको मत भोगो। आत्मविषयक अज्ञानसे प्रतीत होनेवाला सांसारिक भेद-भाव भ्रममूलक ही है, ऐसा समझो॥ ५६॥✎ 1764

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1764 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आत्म-विषयक → आत्मविषयक

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