श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.15

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

प्रायेणार्थाः कदर्याणां न सुखाय कदाचन।

इह चात्मोपतापाय मृतस्य नरकाय च॥ १५

prāyeṇārthāḥ kadaryāṇāṃ na sukhāya kadācana|

iha cātmopatāpāya mṛtasya narakāya ca|| 15

अर्थ

प्रायः देखा जाता है कि कृपण पुरुषोंको धनसे कभी सुख नहीं मिलता। इस लोकमें तो वे धन कमाने और रक्षाकी चिन्तासे जलते रहते हैं और मरनेपर धर्म न करनेके कारण नरकमें जाते हैं॥ १५॥

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