श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.30

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तत्र मामनुमोदेरन् देवास्त्रिभुवनेश्‍वराः।

मुहूर्तेन ब्रह्मलोकं खट्वांगः समसाधयत्॥ ३०

tatra māmanumoderan devāstribhuvaneśvarāḥ|

muhūrtena brahmalokaṃ khaṭvāṃgaḥ samasādhayat|| 30

अर्थ

तीनों लोकोंके स्वामी देवगण मेरे इस संकल्पका अनुमोदन करें। अभी निराश होनेकी कोई बात नहीं है, क्योंकि राजा खट्वांगने तो दो घड़ीमें ही भगवद्धामकी प्राप्ति कर ली थी॥ ३०॥

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