श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.23.33

एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तं वै प्रवयसं भिक्षुमवधूतमसज्जनाः।

दृष्ट्वा पर्यभवन् भद्र बह्वीभिः परिभूतिभिः॥ ३३

taṃ vai pravayasaṃ bhikṣumavadhūtamasajjanāḥ|

dṛṣṭvā paryabhavan bhadra bahvībhiḥ paribhūtibhiḥ|| 33

अर्थ

उद्धवजी! वह भिक्षुक अवधूत बहुत बूढ़ा हो गया था। दुष्ट उसे देखते ही टूट पड़ते और तरह-तरहसे उसका तिरस्कार करके उसे तंग करते॥ ३३॥

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