॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.23.35
प्रदाय च पुनस्तानि दर्शितान्याददुर्मुनेः।
अन्नं च भैक्ष्यसम्पन्नं भुंजानस्य सरित्तटे॥ ३५
pradāya ca punastāni darśitānyādadurmuneḥ|
annaṃ ca bhaikṣyasampannaṃ bhuṃjānasya sarittaṭe|| 35
अर्थ
कोई-कोई वे वस्तुएँ देकर और कोई दिखला-दिखलाकर फिर छीन लेते। जब वह अवधूत मधुकरी माँगकर लाता और बाहर नदी-तटपर भोजन करने बैठता, तो पापी लोग कभी उसके सिरपर मूत देते, तो कभी थूक देते। वे लोग उस मौनी अवधूतको तरह-तरहसे बोलनेके लिये विवश करते और जब वह इसपर भी न बोलता तो उसे पीटते॥ ३५-३६॥