जगत्में छोटे-बड़े, मोटे-पतले—जितने भी पदार्थ बनते हैं, सब प्रकृति और पुरुष दोनोंके संयोगसे ही सिद्ध होते है॥ १६॥
अणुर्बृहत् कृशः स्थूलो यो यो भावः प्रसिध्यति।
सर्वोऽप्युभयसंयुक्तः प्रकृत्या पुरुषेण च॥ १६
जगत्में छोटे-बड़े, मोटे-पतले—जितने भी पदार्थ बनते हैं, सब प्रकृति और पुरुष दोनोंके संयोगसे ही सिद्ध होते है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 865) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/16/