श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.16

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अणुर्बृहत् कृशः स्थूलो यो यो भावः प्रसिध्यति।

सर्वोऽप्युभयसंयुक्तः प्रकृत्या पुरुषेण च॥ १६

aṇurbṛhat kṛśaḥ sthūlo yo yo bhāvaḥ prasidhyati|

sarvo'pyubhayasaṃyuktaḥ prakṛtyā puruṣeṇa ca|| 16

अर्थ

जगत‍्में छोटे-बड़े, मोटे-पतले—जितने भी पदार्थ बनते हैं, सब प्रकृति और पुरुष दोनोंके संयोगसे ही सिद्ध होते है॥ १६॥

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