उसके लीन होनेकी प्रक्रिया यह है कि प्राणियोंके शरीर अन्नमें, अन्न बीजमें, बीज भूमिमें और भूमि गन्ध-तन्मात्रामें लीन हो जाती है॥ २२॥
अन्ने प्रलीयते मर्त्यमन्नं धानासु लीयते।
धाना भूमौ प्रलीयन्ते भूमिर्गन्धे प्रलीयते॥ २२
उसके लीन होनेकी प्रक्रिया यह है कि प्राणियोंके शरीर अन्नमें, अन्न बीजमें, बीज भूमिमें और भूमि गन्ध-तन्मात्रामें लीन हो जाती है॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.24.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 866) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/24/22/