श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.22

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अन्‍ने प्रलीयते मर्त्यमन्‍नं धानासु लीयते।

धाना भूमौ प्रलीयन्ते भूमिर्गन्धे प्रलीयते॥ २२

anne pralīyate martyamannaṃ dhānāsu līyate|

dhānā bhūmau pralīyante bhūmirgandhe pralīyate|| 22

अर्थ

उसके लीन होनेकी प्रक्रिया यह है कि प्राणियोंके शरीर अन्‍नमें, अन्‍न बीजमें, बीज भूमिमें और भूमि गन्ध-तन्मात्रामें लीन हो जाती है॥ २२॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें