श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.24.7

एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

वैकारिकस्तैजसश्‍च तामसश्‍चेत्यहं त्रिवृत्।

तन्मात्रेन्द्रियमनसां कारणं चिदचिन्मयः॥ ७

vaikārikastaijasaśca tāmasaścetyahaṃ trivṛt|

tanmātrendriyamanasāṃ kāraṇaṃ cidacinmayaḥ|| 7

अर्थ

वह तीन प्रकारका है—सात्त्विक, राजस और तामस। अहंकार पंचतन्मात्रा, इन्द्रिय और मनका कारण है; इसलिये वह जड-चेतन—उभयात्मक है॥ ७॥

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