श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.25.14

एकादश स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

यदा जयेत्तमः सत्त्वं रजः संगं भिदा चलम्।

तदा दुःखेन युज्येत कर्मणा यशसा श्रिया॥ १४

yadā jayettamaḥ sattvaṃ rajaḥ saṃgaṃ bhidā calam|

tadā duḥkhena yujyeta karmaṇā yaśasā śriyā|| 14

अर्थ

रजोगुण भेदबुद्धिका कारण है। उसका स्वभाव है आसक्ति और प्रवृत्ति। जिस समय तमोगुण और सत्त्वगुणको दबाकर रजोगुण बढ़ता है, उस समय मनुष्य दुःख, कर्म, यश और लक्ष्मीसे सम्पन्‍न होता है॥ १४॥

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