देवर्षि नारद, भगवान् व्यासदेव और आचार्य बृहस्पति आदि बड़े-बड़े ऋषि-मुनि यह बात बार-बार कहते हैं कि क्रियायोगके द्वारा आपकी आराधना ही मनुष्योंके परम कल्याणकी साधना है॥ २॥✎ 1765
एतद् वदन्ति मुनयो मुहुर्निःश्रेयसं नृणाम्।
नारदो भगवान् व्यास आचार्योऽङ्गिरसः सुतः॥ २
देवर्षि नारद, भगवान् व्यासदेव और आचार्य बृहस्पति आदि बड़े-बड़े ऋषि-मुनि यह बात बार-बार कहते हैं कि क्रियायोगके द्वारा आपकी आराधना ही मनुष्योंके परम कल्याणकी साधना है॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.27.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 875) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/27/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)