श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.27.41

एकादश स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

जुहुयान्मूलमन्त्रेण षोडशर्चावदानतः।

धर्मादिभ्यो यथान्यायं मन्त्रैः स्विष्टकृतं बुधः॥ ४१

juhuyānmūlamantreṇa ṣoḍaśarcāvadānataḥ|

dharmādibhyo yathānyāyaṃ mantraiḥ sviṣṭakṛtaṃ budhaḥ|| 41

अर्थ

इसके बाद अपने इष्टमन्त्रसे अथवा ‘ॐ नमो नारायणाय’ इस अष्टाक्षर मन्त्रसे तथा पुरुषसूक्तके सोलह मन्त्रोंसे हवन करे। बुद्धिमान् पुरुषको चाहिये कि धर्मादि देवताओंके लिये भी विधिपूर्वक मन्त्रोंसे हवन करे और स्विष्टकृत् आहुति भी दे॥ ४१॥

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