॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.3.24
शौचं तपस्तितिक्षां च मौनं स्वाध्यायमार्जवम्।
ब्रह्मचर्यमहिंसां च समत्वं द्वन्द्वसंज्ञयोः॥ २४
śaucaṃ tapastitikṣāṃ ca maunaṃ svādhyāyamārjavam|
brahmacaryamahiṃsāṃ ca samatvaṃ dvandvasaṃjñayoḥ|| 24
अर्थ
मिट्टी, जल आदिसे बाह्य शरीरकी पवित्रता, छल-कपट आदिके त्यागसे भीतरकी पवित्रता, अपने धर्मका अनुष्ठान, सहनशक्ति, मौन, स्वाध्याय, सरलता, ब्रह्मचर्य, अहिंसा तथा शीत-उष्ण, सुख-दुःख आदि द्वन्द्वोंमें हर्ष-विषादसे रहित होना सीखे॥ २४॥