niṣṭhāmarhatha no vaktuṃ yūyaṃ hi brahmavittamāḥ|| 34
अर्थ
राजा निमिने पूछा—महर्षियो! आपलोग परमात्माका वास्तविक स्वरूप जाननेवालोंमें सर्वश्रेष्ठ हैं। इसलिये मुझे यह बतलाइये कि जिस परब्रह्म परमात्माका ‘नारायण’ नामसे वर्णन किया जाता है, उनका स्वरूप क्या है?॥ ३४॥
नारायणाभिधानस्य ब्रह्मणः परमात्मनः।
निष्ठामर्हथ नो वक्तुं यूयं हि ब्रह्मवित्तमाः॥ ३४
राजा निमिने पूछा—महर्षियो! आपलोग परमात्माका वास्तविक स्वरूप जाननेवालोंमें सर्वश्रेष्ठ हैं। इसलिये मुझे यह बतलाइये कि जिस परब्रह्म परमात्माका ‘नारायण’ नामसे वर्णन किया जाता है, उनका स्वरूप क्या है?॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.3.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 727) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/3/34/