॥ श्रीहरिः ॥
अथ त्रिंशोऽध्यायः
यदुकुलका संहार
राजोवाच
ततो महाभागवत उद्धवे निर्गते वनम्।
द्वारवत्यां किमकरोद् भगवान् भूतभावनः॥ १
tato mahābhāgavata uddhave nirgate vanam|
dvāravatyāṃ kimakarod bhagavān bhūtabhāvanaḥ|| 1
अर्थ
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! जब महाभागवत उद्धवजी बदरीवनको चले गये, तब भूतभावन भगवान् श्रीकृष्णने द्वारकामें क्या लीला रची?॥ १॥
ततो महाभागवत उद्धवे निर्गते वनम्।
द्वारवत्यां किमकरोद् भगवान् भूतभावनः॥ १
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! जब महाभागवत उद्धवजी बदरीवनको चले गये, तब भूतभावन भगवान् श्रीकृष्णने द्वारकामें क्या लीला रची?॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 897) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/1/