yathā punarahaṃ tvevaṃ na kuryāṃ sadatikramam|| 37
अर्थ
वैकुण्ठनाथ! मैं निरपराध हरिणोंको मारनेवाला महापापी हूँ। आप मुझे अभी-अभी मार डालिये, क्योंकि मर जानेपर मैं फिर कभी आप-जैसे महापुरुषोंका ऐसा अपराध न करूँगा॥ ३७॥
तन्माऽऽशु जहि वैकुण्ठ पाप्मानं मृगलुब्धकम्।
यथा पुनरहं त्वेवं न कुर्यां सदतिक्रमम्॥ ३७
वैकुण्ठनाथ! मैं निरपराध हरिणोंको मारनेवाला महापापी हूँ। आप मुझे अभी-अभी मार डालिये, क्योंकि मर जानेपर मैं फिर कभी आप-जैसे महापुरुषोंका ऐसा अपराध न करूँगा॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 901) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/37/