श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.31.27

एकादश स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

य एतद् देवदेवस्य विष्णोः कर्माणि जन्म च।

कीर्तयेच्छ्रद्धया मर्त्यः सर्वपापैः प्रमुच्यते॥ २७

ya etad devadevasya viṣṇoḥ karmāṇi janma ca|

kīrtayecchraddhayā martyaḥ sarvapāpaiḥ pramucyate|| 27

अर्थ

मैंने तुम्हें देवताओंके भी आराध्यदेव भगवान् श्रीकृष्णकी जन्मलीला और कर्मलीला सुनायी। जो मनुष्य श्रद्धाके साथ इसका कीर्तन करता है, वह समस्त पापोंसे मुक्त हो जाता है॥ २७॥

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