एवंविधानि कर्माणि जन्मानि च जगत्पतेः।
भूरीणि भूरियशसो वर्णितानि महाभुज॥ २३
महाबाहु विदेहराज! भगवान्की कीर्ति अनन्त है। महात्माओंने जगत्पति भगवान्के ऐसे-ऐसे अनेकों जन्म और कर्मोंका प्रचुरतासे गान भी किया है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.4.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 736) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/4/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)