॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.4.8
विज्ञाय शक्रकृतमक्रममादिदेवः
प्राह प्रहस्य गतविस्मय एजमानान्।
मा भैष्ट भो मदन मारुत देववध्वो
गृह्णीत नो बलिमशून्यमिमं कुरुध्वम्॥ ८
vijñāya śakrakṛtamakramamādidevaḥ
prāha prahasya gatavismaya ejamānān|
mā bhaiṣṭa bho madana māruta devavadhvo
gṛhṇīta no balimaśūnyamimaṃ kurudhvam|| 8
अर्थ
आदिदेव नर-नारायणने यह जानकर कि यह इन्द्रका कुचक्र है, भयसे काँपते हुए काम आदिकोंसे हँसकर कहा—उस समय उनके मनमें किसी प्रकारका अभिमान या आश्चर्य नहीं था। ‘कामदेव, मलय-मारुत और देवांगनाओ! तुमलोग डरो मत; हमारा आतिथ्य स्वीकार करो। अभी यहीं ठहरो, हमारा आश्रम सूना मत करो’॥ ८॥✎ 1727