॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.5.26
विष्णुर्यज्ञः पृश्निगर्भः सर्वदेव उरुक्रमः।
वृषाकपिर्जयन्तश्च उरुगाय इतीर्यते॥ २६
viṣṇuryajñaḥ pṛśnigarbhaḥ sarvadeva urukramaḥ|
vṛṣākapirjayantaśca urugāya itīryate|| 26
अर्थ
त्रेतायुगमें अधिकांश लोग विष्णु, यज्ञ, पृष्निगर्भ, सर्वदेव, उरुक्रम, वृषाकपि, जयन्त और उरुगाय आदि नामोंसे उनके गुण और लीला आदिका कीर्तन करते है॥ २६॥