श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.5.44

एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

ततोऽन्तर्दधिरे सिद्धाः सर्वलोकस्य पश्यतः।

राजा धर्मानुपातिष्ठन्‍नवाप परमां गतिम्॥ ४४

tato'ntardadhire siddhāḥ sarvalokasya paśyataḥ|

rājā dharmānupātiṣṭhannavāpa paramāṃ gatim|| 44

अर्थ

इसके बाद सब लोगोंके सामने ही वे सिद्ध अन्तर्धान हो गये। विदेहराज निमिने उनसे सुने हुए भागवतधर्मोंका आचरण किया और परमगति प्राप्त की॥ ४४॥

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