श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.6.27

एकादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ततः स्वधाम परमं विशस्व यदि मन्यसे।

सलोकाँल्लोकपालान् नः पाहि वैकुण्ठ किंकरान्॥ २७

tataḥ svadhāma paramaṃ viśasva yadi manyase|

salokām̐llokapālān naḥ pāhi vaikuṇṭha kiṃkarān|| 27

अर्थ

इसलिये वैकुण्ठनाथ! यदि आप उचित समझें तो अपने परमधाममें पधारिये और अपने सेवक हम लोकपालोंका तथा हमारे लोकोंका पालन-पोषण कीजिये॥ २७॥

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