॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.7.27
प्रायो धर्मार्थकामेषु विवित्सायां च मानवाः।
हेतुनैव समीहन्ते आयुषो यशसः श्रियः॥ २७
prāyo dharmārthakāmeṣu vivitsāyāṃ ca mānavāḥ|
hetunaiva samīhante āyuṣo yaśasaḥ śriyaḥ|| 27
अर्थ
ऐसा देखा जाता है कि मनुष्य आयु, यश अथवा सौन्दर्य-सम्पत्ति आदिकी अभिलाषा लेकर ही धर्म, अर्थ, काम अथवा तत्त्व-जिज्ञासामें प्रवृत्त होते हैं; अकारण कहीं किसीकी प्रवृत्ति नहीं देखी जाती॥ २७॥