श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.31

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

यदुनैवं महाभागो ब्रह्मण्येन सुमेधसा।

पृष्टः सभाजितः प्राह प्रश्रयावनतं द्विजः॥ ३१

yadunaivaṃ mahābhāgo brahmaṇyena sumedhasā|

pṛṣṭaḥ sabhājitaḥ prāha praśrayāvanataṃ dvijaḥ|| 31

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—उद्धव! हमारे पूर्वज महाराज यदुकी बुद्धि शुद्ध थी और उनके हृदयमें ब्राह्मण-भक्ति थी। उन्होंने परमभाग्यवान् दत्तात्रेयजीका अत्यन्त सत्कार करके यह प्रश्‍न पूछा और बड़े विनम्रभावसे सिर झुकाकर वे उनके सामने खड़े हो गये। अब दत्तात्रेयजीने कहा॥ ३१॥

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