॥ श्रीहरिः ॥
यतो यदनुशिक्षामि यथा वा नाहुषात्मज।
तत्तथा पुरुषव्याघ्र निबोध कथयामि ते॥ ३६
yato yadanuśikṣāmi yathā vā nāhuṣātmaja|
tattathā puruṣavyāghra nibodha kathayāmi te|| 36
अर्थ
वीरवर ययातिनन्दन! मैंने जिससे जिस प्रकार जो कुछ सीखा है, वह सब ज्यों-का-त्यों तुमसे कहता हूँ, सुनो॥ ३६॥
यतो यदनुशिक्षामि यथा वा नाहुषात्मज।
तत्तथा पुरुषव्याघ्र निबोध कथयामि ते॥ ३६
वीरवर ययातिनन्दन! मैंने जिससे जिस प्रकार जो कुछ सीखा है, वह सब ज्यों-का-त्यों तुमसे कहता हूँ, सुनो॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.7.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 756) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/7/36/