प्यारे उद्धव! जिस क्षण मैं मर्त्यलोकका परित्याग कर दूँगा, उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायँगे और थोड़े ही दिनोंमें पृथ्वीपर कलियुगका बोलबाला हो जायगा॥ ४॥
यर्ह्येवायं मया त्यक्तो लोकोऽयं नष्टमंगलः।
भविष्यत्यचिरात् साधो कलिनापि निराकृतः॥ ४
प्यारे उद्धव! जिस क्षण मैं मर्त्यलोकका परित्याग कर दूँगा, उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायँगे और थोड़े ही दिनोंमें पृथ्वीपर कलियुगका बोलबाला हो जायगा॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.7.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 752) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/7/4/