श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.4

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

यर्ह्येवायं मया त्यक्तो लोकोऽयं नष्टमंगलः।

भविष्यत्यचिरात् साधो कलिनापि निराकृतः॥ ४

yarhyevāyaṃ mayā tyakto loko'yaṃ naṣṭamaṃgalaḥ|

bhaviṣyatyacirāt sādho kalināpi nirākṛtaḥ|| 4

अर्थ

प्यारे उद्धव! जिस क्षण मैं मर्त्यलोकका परित्याग कर दूँगा, उसी क्षण इसके सारे मंगल नष्ट हो जायँगे और थोड़े ही दिनोंमें पृथ्वीपर कलियुगका बोलबाला हो जायगा॥ ४॥

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