श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.7.57

एकादश स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

कपोती प्रथमं गर्भं गृह्णती काल आगते।

अण्डानि सुषुवे नीडे स्वपत्युः सन्‍निधौ सती॥ ५७

kapotī prathamaṃ garbhaṃ gṛhṇatī kāla āgate|

aṇḍāni suṣuve nīḍe svapatyuḥ sannidhau satī|| 57

अर्थ

समय आनेपर कबूतरीको पहला गर्भ रहा। उसने अपने पतिके पास ही घोंसलेमें अंडे दिये॥ ५७॥✎ 1820

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1820 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): बच्चे → हाथ-पैरवाले बच्चे

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें