श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.20

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

इन्द्रियाणि जयन्त्याशु निराहारा मनीषिणः।

वर्जयित्वा तु रसनं तन्‍निरन्‍नस्य वर्धते॥ २०

indriyāṇi jayantyāśu nirāhārā manīṣiṇaḥ|

varjayitvā tu rasanaṃ tannirannasya vardhate|| 20

अर्थ

विवेकी पुरुष भोजन बंद करके दूसरी इन्द्रियोंपर तो बहुत शीघ्र विजय प्राप्त कर लेते हैं, परन्तु इससे उनकी रसना-इन्द्रिय वशमें नहीं होती। वह तो भोजन बंद कर देनेसे और भी प्रबल हो जाती है॥ २०॥

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