श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.25

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

आगतेष्वपयातेषु सा संकेतोपजीविनी।

अप्यन्यो वित्तवान् कोऽपि मामुपैष्यति भूरिदः॥ २५

āgateṣvapayāteṣu sā saṃketopajīvinī|

apyanyo vittavān ko'pi māmupaiṣyati bhūridaḥ|| 25

अर्थ

जब आने-जानेवाले आगे बढ़ जाते, तब फिर वह संकेतजीविनी वेश्या यही सोचती कि अवश्य ही अबकी बार कोई ऐसा धनी मेरे पास आवेगा जो मुझे बहुत-सा धन देगा॥ २५॥

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