श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.9.2

एकादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सामिषं कुररं जघ्नुर्बलिनो ये निरामिषाः।

तदामिषं परित्यज्य स सुखं समविन्दत॥ २

sāmiṣaṃ kuraraṃ jaghnurbalino ye nirāmiṣāḥ|

tadāmiṣaṃ parityajya sa sukhaṃ samavindata|| 2

अर्थ

एक कुररपक्षी अपनी चोंचमें मांसका टुकड़ा लिये हुए था। उस समय दूसरे बलवान् पक्षी, जिनके पास मांस नहीं था, उससे छीननेके लिये उसे घेरकर चोंचें मारने लगे। जब कुररपक्षीने अपनी चोंचसे मांसका टुकड़ा फेंक दिया, तभी उसे सुख मिला॥ २॥

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