श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.21

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

काण्वायना इमे भूमिं चत्वारिंशच्च पंच च।

शतानि त्रीणि भोक्ष्यन्ति वर्षाणां च कलौ युगे॥ २१

kāṇvāyanā ime bhūmiṃ catvāriṃśacca paṃca ca|

śatāni trīṇi bhokṣyanti varṣāṇāṃ ca kalau yuge|| 21

अर्थ

कण्ववंशके ये चार नरपति काण्वायन कहलायेंगे और कलियुगमें तीन सौ पैंतालीस वर्षतक पृथ्वीका उपभोग करेंगे॥ २१॥✎ 1780

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1780 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अनिष्ट-कर्मा, → अनिष्टकर्मा,

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