प्रिय परीक्षित्! कण्ववंशी सुशर्माका एक शूद्र सेवक होगा—बली। वह अन्ध्रजातिका एवं बड़ा दुष्ट होगा। वह सुशर्माको मारकर कुछ समयतक स्वयं पृथ्वीका राज्य करेगा॥ २२॥✎ 1780
हत्वा काण्वं सुशर्माणं तद्भृत्यो वृषलो बली।
गां भोक्ष्यत्यन्ध्रजातीयः कंचित् कालमसत्तमः॥ २२
प्रिय परीक्षित्! कण्ववंशी सुशर्माका एक शूद्र सेवक होगा—बली। वह अन्ध्रजातिका एवं बड़ा दुष्ट होगा। वह सुशर्माको मारकर कुछ समयतक स्वयं पृथ्वीका राज्य करेगा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.1.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 909) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/1/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)