श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.38

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सौराष्ट्रावन्त्याभीराश्‍च शूरा अर्बुदमालवाः।

व्रात्या द्विजा भविष्यन्ति शूद्रप्राया जनाधिपाः॥ ३८

saurāṣṭrāvantyābhīrāśca śūrā arbudamālavāḥ|

vrātyā dvijā bhaviṣyanti śūdraprāyā janādhipāḥ|| 38

अर्थ

परीक्षित्! ज्यों-ज्यों घोर कलियुग आता जायगा, त्यों-त्यों सौराष्ट्र अवन्ती, आभीर, शूर, अर्बुद और मालव देशके ब्राह्मणगण संस्कारशून्य हो जायँगे तथा राजालोग भी शूद्रतुल्य हो जायँगे॥ ३८॥

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