श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.5

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

शिशुनागस्ततो भाव्यः काकवर्णस्तु तत्सुतः।

क्षेमधर्मा तस्य सुतः क्षेत्रज्ञः क्षेमधर्मजः॥ ५

śiśunāgastato bhāvyaḥ kākavarṇastu tatsutaḥ|

kṣemadharmā tasya sutaḥ kṣetrajñaḥ kṣemadharmajaḥ|| 5

अर्थ

इसके पश्‍चात् शिशुनाग नामका राजा होगा। शिशुनागका काकवर्ण, उसका क्षेमधर्मा और क्षेमधर्माका पुत्र होगा क्षेत्रज्ञ॥ ५॥

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