श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

विधिसारः सुतस्तस्याजातशत्रुर्भविष्यति।

दर्भकस्तत्सुतो भावी दर्भकस्याजयः स्मृतः॥ ६

vidhisāraḥ sutastasyājātaśatrurbhaviṣyati|

darbhakastatsuto bhāvī darbhakasyājayaḥ smṛtaḥ|| 6

अर्थ

क्षेत्रज्ञका विधिसार, उसका अजातशत्रु, फिर दर्भक और दर्भकका पुत्र अजय होगा॥ ६॥

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