॥ श्रीहरिः ॥
गोपानां च परित्राणं दावाग्ने परिसर्पतः।
दमनं कालियस्याहेर्महाहेर्नन्दमोक्षणम्॥ ३०
gopānāṃ ca paritrāṇaṃ dāvāgne parisarpataḥ|
damanaṃ kāliyasyāhermahāhernandamokṣaṇam|| 30
अर्थ
दावानलसे घिरे गोपोंकी रक्षा की। कालिय नागका दमन किया। अजगरसे नन्दबाबाको छुड़ाया॥ ३०॥
गोपानां च परित्राणं दावाग्ने परिसर्पतः।
दमनं कालियस्याहेर्महाहेर्नन्दमोक्षणम्॥ ३०
दावानलसे घिरे गोपोंकी रक्षा की। कालिय नागका दमन किया। अजगरसे नन्दबाबाको छुड़ाया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.12.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 973) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/12/30/