इसके बाद गोपियोंने भगवान्को पतिरूपसे प्राप्त करनेके लिये व्रत किया और भगवान् श्रीकृष्णने प्रसन्न होकर उन्हें अभिमत वर दिया। भगवान्ने यज्ञपत्नियोंपर कृपा की। उनके पतियों—ब्राह्मणोंको बड़ा पश्चत्ताप हुआ॥ ३१॥
व्रतचर्या तु कन्यानां यत्र तुष्टोऽच्युतो व्रतैः।
प्रसादो यज्ञपत्नीभ्यो विप्राणां चानुतापनम्॥ ३१
इसके बाद गोपियोंने भगवान्को पतिरूपसे प्राप्त करनेके लिये व्रत किया और भगवान् श्रीकृष्णने प्रसन्न होकर उन्हें अभिमत वर दिया। भगवान्ने यज्ञपत्नियोंपर कृपा की। उनके पतियों—ब्राह्मणोंको बड़ा पश्चत्ताप हुआ॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.12.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 973) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/12/31/