श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

नमस्तस्मै भगवते वासुदेवाय साक्षिणे।

य इदं कृपया कस्मै व्याचचक्षे मुमुक्षवे॥ २०

namastasmai bhagavate vāsudevāya sākṣiṇe|

ya idaṃ kṛpayā kasmai vyācacakṣe mumukṣave|| 20

अर्थ

हम उन सर्वसाक्षी भगवान् वासुदेवको नमस्कार करते हैं, जिन्होंने कृपा करके मोक्षाभिलाषी ब्रह्माजीको इस श्रीमद्भागवतमहापुराणका उपदेश किया॥ २०॥✎ 1459

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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