साथ ही हम उन योगिराज ब्रह्मस्वरूप श्रीशुकदेवजीको भी नमस्कार करते हैं, जिन्होंने श्रीमद्भागवतमहापुराण सुनाकर संसार-सर्पसे डसे हुए राजर्षि परीक्षित्को मुक्त किया॥ २१॥✎ 1459
योगीन्द्राय नमस्तस्मै शुकाय ब्रह्मरूपिणे।
संसारसर्पदष्टं यो विष्णुरातममूमुचत्॥ २१
साथ ही हम उन योगिराज ब्रह्मस्वरूप श्रीशुकदेवजीको भी नमस्कार करते हैं, जिन्होंने श्रीमद्भागवतमहापुराण सुनाकर संसार-सर्पसे डसे हुए राजर्षि परीक्षित्को मुक्त किया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 982) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1459 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित्को → परीक्षित्को