श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.31

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यदा देवर्षयः सप्त मघासु विचरन्ति हि।

तदा प्रवृत्तस्तु कलिर्द्वादशाब्दशतात्मकः॥ ३१

yadā devarṣayaḥ sapta maghāsu vicaranti hi|

tadā pravṛttastu kalirdvādaśābdaśatātmakaḥ|| 31

अर्थ

परीक्षित्! जिस समय सप्तर्षि मघानक्षत्रपर विचरण करते रहते हैं, उसी समय कलियुगका प्रारम्भ होता है। कलियुगकी आयु देवताओंकी वर्षगणनासे बारह सौ वर्षोंकी अर्थात् मनुष्योंकी गणनाके अनुसार चार लाख बत्तीस हजार वर्षकी है॥ ३१॥✎ 1924

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1924 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): परम-धामको → परमधामको

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें