श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.25

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्मिँल्लुब्धा दुराचारा निर्दयाः शुष्कवैरिणः।

दुर्भगा भूरितर्षाश्‍च शूद्रदाशोत्तराः प्रजाः॥ २५

tasmim̐llubdhā durācārā nirdayāḥ śuṣkavairiṇaḥ|

durbhagā bhūritarṣāśca śūdradāśottarāḥ prajāḥ|| 25

अर्थ

कलियुगमें लोग लोभी, दुराचारी और कठोरहृदय होते हैं। वे झूठमूठ एक-दूसरेसे वैर मोल ले लेते हैं, एवं लालसा-तृष्णाकी तरंगोंमें बहते रहते हैं। उस समयके अभागे लोगोंमें शूद्र, केवट आदिकी ही प्रधानता रहती है॥ २५॥

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