सभी प्राणियोंमें तीन गुण होते हैं—सत्त्व, रज और तम। कालकी प्रेरणासे समय-समयपर शरीर, प्राण और मनमें उनका ह्रास और विकास भी हुआ करता है॥ २६॥✎ 1453
सत्त्वं रजस्तम इति दृश्यन्ते पुरुषे गुणाः।
कालसंचोदितास्ते वै परिवर्तन्त आत्मनि॥ २६
सभी प्राणियोंमें तीन गुण होते हैं—सत्त्व, रज और तम। कालकी प्रेरणासे समय-समयपर शरीर, प्राण और मनमें उनका ह्रास और विकास भी हुआ करता है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.3.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 920) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/3/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)