श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.26

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सत्त्वं रजस्तम इति दृश्यन्ते पुरुषे गुणाः।

कालसंचोदितास्ते वै परिवर्तन्त आत्मनि॥ २६

sattvaṃ rajastama iti dṛśyante puruṣe guṇāḥ|

kālasaṃcoditāste vai parivartanta ātmani|| 26

अर्थ

सभी प्राणियोंमें तीन गुण होते हैं—सत्त्व, रज और तम। कालकी प्रेरणासे समय-समयपर शरीर, प्राण और मनमें उनका ह्रास और विकास भी हुआ करता है॥ २६॥✎ 1453

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1453 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ह्रस → ह्रास

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