श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.3.34

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

ह्रस्वकाया महाहारा भूर्यपत्या गतह्रियः।

शश्‍वत्कटुकभाषिण्यश्‍चौर्यमायोरुसाहसाः॥ ३४

hrasvakāyā mahāhārā bhūryapatyā gatahriyaḥ|

śaśvatkaṭukabhāṣiṇyaścauryamāyorusāhasāḥ|| 34

अर्थ

स्त्रियोंका आकार तो छोटा हो जाता है, पर भूख बढ़ जाती है। उन्हें सन्तान बहुत अधिक होती है और वे अपनी कुल-मर्यादाका उल्लंघन करके लाज-हया—जो उनका भूषण है—छोड़ बैठती हैं। वे सदा-सर्वदा कड़वी बात कहती रहती हैं और चोरी तथा कपटमें बड़ी निपुण हो जाती हैं। उनमें साहस भी बहुत बढ़ जाता है॥ ३४॥✎ 1454

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1454 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हैें॥ → हैं॥

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