॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.6
यां विसृज्यैव मनवस्तत्सुताश्च कुरूद्वह।
गता यथागतं युद्धे तां मां जेष्यन्त्यबुद्धयः॥ ६
yāṃ visṛjyaiva manavastatsutāśca kurūdvaha|
gatā yathāgataṃ yuddhe tāṃ māṃ jeṣyantyabuddhayaḥ|| 6
अर्थ
परीक्षित्! पृथ्वी कहती है कि ‘बड़े-बड़े मनु और उनके वीर पुत्र मुझे ज्यों-की-त्यों छोड़कर जहाँसे आये थे, वहीं खाली हाथ लौट गये, मुझे अपने साथ न ले जा सके। अब ये मूर्ख राजा मुझे युद्धमें जीतकर वशमें करना चाहते हैं॥ ६॥