श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.5.9

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

एवमात्मानमात्मस्थमात्मनैवामृश प्रभो।

बुद्ध्यानुमानगर्भिण्या वासुदेवानुचिन्तया॥ ९

evamātmānamātmasthamātmanaivāmṛśa prabho|

buddhyānumānagarbhiṇyā vāsudevānucintayā|| 9

अर्थ

हे राजन्! तुम अपनी विशुद्ध एवं विवेकवती बुद्धिको परमात्माके चिन्तनसे भरपूर कर लो और स्वयं ही अपने अन्तरमें स्थित परमात्माका साक्षात्कार करो॥ ९॥

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