श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.13

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ब्रह्मभूतस्य राजर्षेर्देहोऽहिगरलाग्‍निना।

बभूव भस्मसात् सद्यः पश्यतां सर्वदेहिनाम्॥ १३

brahmabhūtasya rājarṣerdeho'higaralāgninā|

babhūva bhasmasāt sadyaḥ paśyatāṃ sarvadehinām|| 13

अर्थ

राजर्षि परीक्षित् तक्षकके डसनेके पहले ही ब्रह्ममें स्थित हो चुके थे। अब तक्षकके विषकी आगसे उनका शरीर सबके सामने ही जलकर भस्म हो गया॥ १३॥✎ 1455 1456

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1455 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को
  • #1456 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित‍्को → परीक्षित‍्को

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