॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.6.14
हाहाकारो महानासीद् भुवि खे दिक्षु सर्वतः।
विस्मिता ह्यभवन् सर्वे देवासुरनरादयः॥ १४
hāhākāro mahānāsīd bhuvi khe dikṣu sarvataḥ|
vismitā hyabhavan sarve devāsuranarādayaḥ|| 14
अर्थ
पृथ्वी, आकाश और सब दिशाओंमें बड़े जोरसे ‘हाय-हाय’ की ध्वनि होने लगी। देवता, असुर, मनुष्य आदि सब-के-सब परीक्षित्की यह परम गति देखकर विस्मित हो गये॥ १४॥