श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

हाहाकारो महानासीद् भुवि खे दिक्षु सर्वतः।

विस्मिता ह्यभवन् सर्वे देवासुरनरादयः॥ १४

hāhākāro mahānāsīd bhuvi khe dikṣu sarvataḥ|

vismitā hyabhavan sarve devāsuranarādayaḥ|| 14

अर्थ

पृथ्वी, आकाश और सब दिशाओंमें बड़े जोरसे ‘हाय-हाय’ की ध्वनि होने लगी। देवता, असुर, मनुष्य आदि सब-के-सब परीक्षित‍्की यह परम गति देखकर विस्मित हो गये॥ १४॥

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