॥ श्रीहरिः ॥
देवदुन्दुभयो नेदुर्गन्धर्वाप्सरसो जगुः।
ववृषुः पुष्पवर्षाणि विबुधाः साधुवादिनः॥ १५
devadundubhayo nedurgandharvāpsaraso jaguḥ|
vavṛṣuḥ puṣpavarṣāṇi vibudhāḥ sādhuvādinaḥ|| 15
अर्थ
देवताओंकी दुन्दुभियाँ अपने-आप बज उठीं। गन्धर्व और अप्सराएँ गान करने लगीं। देवतालोग ‘साधु-साधु’ के नारे लगाकर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ १५॥
देवदुन्दुभयो नेदुर्गन्धर्वाप्सरसो जगुः।
ववृषुः पुष्पवर्षाणि विबुधाः साधुवादिनः॥ १५
देवताओंकी दुन्दुभियाँ अपने-आप बज उठीं। गन्धर्व और अप्सराएँ गान करने लगीं। देवतालोग ‘साधु-साधु’ के नारे लगाकर पुष्पोंकी वर्षा करने लगे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 934) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/15/