श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.18

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

अपश्यंस्तक्षकं तत्र राजा पारीक्षितो द्विजान्।

उवाच तक्षकः कस्मान्‍न दह्येतोरगाधमः॥ १८

apaśyaṃstakṣakaṃ tatra rājā pārīkṣito dvijān|

uvāca takṣakaḥ kasmānna dahyetoragādhamaḥ|| 18

अर्थ

बहुत सर्पोंके भस्म होनेपर भी तक्षक न आया, यह देखकर परीक्षित्‍नन्दन राजा जनमेजयने ब्राह्मणोंसे कहा कि ‘ब्राह्मणो! अबतक सर्पाधम तक्षक क्यों नहीं भस्म हो रहा है?’॥ १८॥

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