श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.57

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

शाकल्यस्तत्सुतः स्वां तु पंचधा व्यस्य संहिताम्।

वात्स्यमुद्गलशालीयगोखल्यशिशिरेष्वधात् ॥ ५७

śākalyastatsutaḥ svāṃ tu paṃcadhā vyasya saṃhitām|

vātsyamudgalaśālīyagokhalyaśiśireṣvadhāt || 57

अर्थ

माण्डूकेयके पुत्रका नाम था शाकल्य। उन्होंने अपनी संहिताके पाँच विभाग करके उन्हें वात्स्य, मुद्गल, शालीय, गोखल्य और शिशिर नामक शिष्योंको पढ़ाया॥ ५७॥

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